देख ली मैँने अपनी चमक
अनलहक़ ना रहा कोई शक
गुलिस्ताँ आज हैरान है
देखकर गुल ए तर की दहक
डूब जायेगा सूरज अभी
तेरी पलकेँ गयीँ जो झपक
इश्क़ की आबरू तू बचा
तेरी आँखेँ न जायेँ छलक
मेरी ग़ज़लोँ के हर शेर मेँ
तेरी पाज़ेब की है खनक
क्योँ तेरे क़ामते-सर्द से
आज कौँदे रहेँ हैँ लपक
उनकी आँखोँ के गुल देखकर
रूह जाती है मेरी महक
एक दिन तू सही राह पे
आ ही जायेगा,पहले बहक
रूह बेदार हो तो मिले
ज़र्रे ज़र्रे से कोई सब