Thursday, December 9, 2010

नज़्म

सांवरे सांवरे सांवरे सांवरे
मन ये नाचे हो जैसे कोई पाँव रे

मेरे मासूम दिल को ठिकाना दिया
नाम तुने ही इसका दीवाना दिया
एक बेनाम को मिल गया नाँव रे
सांवरे .....................................

जिसकी माटी में खेले हुए हम जवां
प्यार के हमने बरसों बिताये जहां
याद वो फिर से आया मेरा गाँव रे
सांवरे .....................................

राग ने आज छेड़ा है वो रागिनी
रक्स में चाँद है और है चांदनी
दिल ने गया मेरे सांवरे सांवरे

मन ये नाचे हो जैसे कोई पाँव रे
सावरे.......................................

ग़ज़ल

बरस रही है हंसी आहिस्ता आहिस्ता
यूँ ही मिलेगी ख़ुशी आहिस्ता आहिस्ता
हर एक पल को इतिहास बनाते हुए,
बढरही है जिंदगी आहिस्ता आहिस्ता
शायद कि चढ़ रही है वो अपने छत पे,
बिखर रही है चांदनी आहिस्ता आहिस्ता
अब घर की दहलीज़ कभी रोकेगी नहीं,
फैलने लगी रौशनी आहिस्ता आहिस्ता
मुकम्मल अब हो जायेगा ये अधूरापन,
बोलने लगी है ख़ामोशी आहिस्ता आहिस्ता