Monday, March 14, 2011

आगे रात भी होगी

घटाओं की परत छाई है तो बरसात भी होगी

कोई यूँ ही नहीं चिल्लाता कोई बात भी होगी

सितारे आज गर्दिश में हैं फिर भी मुझे यकीं है

ye daulat ye shohrat kal mere sath भी होगी

din में बिखरे उजालों को इफरात न लुटाओ,

कुछ उजाला jeb में रख लो आगे रात भी होगी

वो घर से निकलता नहीं फिर भी ठोकर खाताहै,

उसके kayalon में pattharon ki kaynaat bhi hogi!

बिखर के भी रो नहीं पाये

तुमको कल छत पे जो नहीं पाये!

चाँद तारे भी सो नहीं पाये!

हमको मिलता कहाँ तेरा कांधा,

हम बिखर के भी रो नहीं पाये!

नींद आती ही nhin जैसे तुम,

हम जमाने से सो नहीं पाये!

हम पे har पल वो आँख रहती hai,

ham kahin chhup ke ro nhin पाये!

ek tumhen aur ik tumhara dil,

तुमसे हम ये ही दो नहीं पाये!

maut आई तब आपने जाना,

बारे-तन्हाई dho नहीं पाये !

हम उसे पा भी न सके ए दोस्त,

और दिल से भी खो नहीं पाये!