Monday, January 3, 2011

बेकरारी को क्या नाम दूँ

इस बीमारी को क्या नाम दूँ

दांव पे जो लगता है जाँ,

उस जुआरी को क्या नाम दूँ

सोई-सोई तेरी आँख की,

इस बेदारी को क्या नाम दूँ

पूजता है जो रंजो-अलम

उस पुजारी को क्या नाम दूँ

कल्ब ओ ग़म ,फुर्क़तो-इश्क की,

रिश्तेदारी को क्या नाम दूँ

चढ़ के यारो उतरती नहीं,

इस खुमारी को क्या नाम दूँ

खुबसूरत कोई कहानी है
वो जो लड़की बड़ी दिवानी है
ये मेरी आँख में जो पानी है
मेरे महबूब कि निशानी है
उस दिले-बेवफा के जैसा है,
ये जो पत्थर लगे कि पानी है!
देख ले मौत भी तो मर जाये,
कितनी कातिल तेरी जवानी है!
डूब के हमने भी पढ़ा इक दिन,
उन निगाहों में इक कहानी है!
दिल,जहां दरसे-इश्क मिलता है,
सर्व विद्या कि राजधानी है!