बेकरारी को क्या नाम दूँ
इस बीमारी को क्या नाम दूँ
दांव पे जो लगता है जाँ,
उस जुआरी को क्या नाम दूँ
सोई-सोई तेरी आँख की,
इस बेदारी को क्या नाम दूँ
पूजता है जो रंजो-अलम
उस पुजारी को क्या नाम दूँ
कल्ब ओ ग़म ,फुर्क़तो-इश्क की,
रिश्तेदारी को क्या नाम दूँ
चढ़ के यारो उतरती नहीं,
इस खुमारी को क्या नाम दूँ