कानों में आ रही है सदा नाद ब्रह्म की, या कि तेरी पाजेब ने झंकार किया है...
तुमको कल छत पे जो नहीं पाए
चाँद तारे भी सो नहीं पाए
हमको मिलता कहाँ तेरा कांधा,
हम बिखर के भी रो नहीं पाए,
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