बेकरारी को क्या नाम दूँ
इस बीमारी को क्या नाम दूँ
दांव पे जो लगता है जाँ,
उस जुआरी को क्या नाम दूँ
सोई-सोई तेरी आँख की,
इस बेदारी को क्या नाम दूँ
पूजता है जो रंजो-अलम
उस पुजारी को क्या नाम दूँ
कल्ब ओ ग़म ,फुर्क़तो-इश्क की,
रिश्तेदारी को क्या नाम दूँ
चढ़ के यारो उतरती नहीं,
इस खुमारी को क्या नाम दूँ
रूद्र भाई को नमस्कार !!!
ReplyDeleteजानकार बहुत खुश हुआ की आप भी हिंदी ब्लॉग्गिंग की दुनिया में आ चुके हैं. आपकी ग़ज़लों को सुन तो नहीं सकता लेकिन यहाँ कमसे कम पढ़ तो सकता हूँ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आपकी ग़ज़लों को सुनने का मौका मिलता रहा ,अब तो मैं कलकत्ता विश्वविद्यालय में हूँ और यहाँ इस तरह का माहौल नहीं है .मेरी शुभकामनाएं आपके साथ है
fantastic & mindblowing ghazal....sahab
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