वक़्त-ए-तन्हाई सोचता हूँ मैं
क्या है दुनिया ये और क्या हूँ मैं?
साँस लेने की अब कहाँ फुर्सत
हर घडी तुझको सोचता हूँ मैं
कोई मुझको मेरा पता दे दे
एक मुद्दत से ढूँढता हूँ मैं
याद आये तेरी तो याद आये
अब तुझे भूलने लगा हूँ मैं
तू है कि फिर भी हंसती रहती है
तुझको क्या-क्या न बोलता हूँ मैं?
तू है कि फिर भी हंसती रहती है
ReplyDeleteतुझको क्या-क्या न बोलता हूँ मैं?
SAHAB ISI KO PYAR KAHTE HAIN....
BEHTARIN GHAZAL