बरस रही है हंसी आहिस्ता आहिस्ता
यूँ ही मिलेगी ख़ुशी आहिस्ता आहिस्ता
हर एक पल को इतिहास बनाते हुए,
बढरही है जिंदगी आहिस्ता आहिस्ता
शायद कि चढ़ रही है वो अपने छत पे,
बिखर रही है चांदनी आहिस्ता आहिस्ता
अब घर की दहलीज़ कभी रोकेगी नहीं,
फैलने लगी रौशनी आहिस्ता आहिस्ता
मुकम्मल अब हो जायेगा ये अधूरापन,
बोलने लगी है ख़ामोशी आहिस्ता आहिस्ता
u will be the GHAZAL KING aahista-aahista.
ReplyDelete