कानों में आ रही है सदा नाद ब्रह्म की, या कि तेरी पाजेब ने झंकार किया है...
खामोश रहो तुम सुनो ये आवाज़
हैं फूट रहे मौन से ये अल्फाज़
नादान! कभी तो समझ मेरी बात,
जो नामे-खुदा है नफ़स में है राज़
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