कानों में आ रही है सदा नाद ब्रह्म की, या कि तेरी पाजेब ने झंकार किया है...
इन्सान किसी याद से छूटे ही नहीं
ये बात अलग है कि वो जाने ही नहीं
जो बीत चुका है बुरा माजी मैं उसे,
चाहूं कि भुला दूँ मगर भूले ही नहीं!
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